चौबेपुर विधानसभा :- रामकुमार की क्या पहचान, लंबा चौड़ा करिया जवान


 

राहुल त्रिपाठी

जब चौबेपुर विधानसभा क्षेत्र हुआ करती थी, पर परिसीमन के बाद चौबेपुर, शिवराजपुर ब्लॉक बिल्हौर में जोड़ दिया गया। वहीं कुछ क्षेत्र बिठूर विधानसभा जबकि कानपुर देहात के गांव रसूलाबाद में जोड़ दिए गए। चौबेपुर विधानसभा के वोटर इधर उधर बांट दिए गए। चौबेपुर विधानसभा से विधायक बनने वाले रामकुमार दीक्षित ने अपने राजनैतिक जीवन में दो बार यहां ये जीत हासिल की।

विधानसभा चौबेपुर के मुस्ता गांव निवासी राम कुमार दीक्षित दो बार विधायक चुने गए। शिवराजपुर ब्लाक के मुस्ता गांव में एक साधारण किसान के घर जन्मे स्व0 राम कुमार दीक्षित इमानदारी व विलक्षण प्रतिभा के धनी थे। 6.5 फुट लंबे भारी भरकम शरीर, श्याम वर्ण की कद काठी उनकी अपनी पहचान थी। उस समय क्षेत्र में एक नारा चर्चित हुआ करता था कि राम कुमार की क्या पहचान, लंबा चौड़ा करिया जवान। दो बार विधायक रहे इसके बाद भी अहंकार उनसे कोसों दूर था, राजनीति में वंशवाद के वह धुर विरोधी थे। तभी उन्होंने अपने दोनों पुत्रों गोपी दीक्षित व अजय दीक्षित को राजनीति से दूर रखा।

राजनैतिक सफर

4 फरवरी 1922 को एक साधारण किसान पंडित राम लखन दिक्षित के घर जन्मे राम कुमार दीक्षित बचपन से ही प्रखर बुद्धि के थे। उनकी शिक्षा-दीक्षा उनके गांव से 8 किलोमीटर दूर बैरी गांव के विद्यालय में हुई। उन्होंने स्नातक तक की। शिक्षा ग्रहण करने के बाद 45 वर्ष की उम्र में साल 1967 वह निर्दलीय विधायक चुने गए। 2 वर्ष बाद जब मध्यावधि चुनाव हुए तो वह 1959 में दोबारा कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ते हुए अपने निकटतम प्रतिद्वंदी बृजरानी मिश्रा को भारी मतों से पराजित किया। तत्कालीन मुख्यमंत्री चंद्रभान गुप्ता ने मंत्री पद देने की बात कही, किंतु उन्होंने मंत्री पद यह कहते हुए नकार दिया कि मैं अपनों से दूर हो जाऊंगा। 7 अप्रैल 1975 को हृदय गति रुकने से पंडित राम कुमार दीक्षित का निधन हो गया।

कभी न थकने वाले इंसान

रामकुमार दीक्षित के साथ राजनीति में कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाले रौतापुर कला गांव के अमरनाथ शुक्ला, पारा प्रतापपुर के सूबेदार पांडे, संडीला गांव के राजेंद्र प्रसाद मिश्रा आदि लोग बताते हैं कि चुनाव प्रचार के दौरान वह साइकिल से प्रतिदिन आठ से 10 कोस का सफर सफर व जनसंपर्क करते थे। फिर भी पंडित जी के शरीर पर थकान नहीं होती थी, हम लोग जब आराम करने की बात करते तो कहते कि तुम लोग कैसे जवान हो, जो थक जाते हो शाम तक हम लोग जनसंपर्क करते व जिस गांव में रात हो जाती थी, वहीं रुक जाते थे। वह सुबह नए जोश के साथ अगले गांव प्रचार करने चले जाते थे। शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदानअपनी शिक्षा में कठिनाई झेलने के बाद उन्होंने आम जनमानस के नौनिहालों के लिए मुस्ता गांव में एक उच्च प्राथमिक विद्यालय की स्थापना की। जो वर्तमान में क्षेत्र का प्रतिष्ठित हायर सेकेंडरी स्कूल बन चुका है। वहीं इन्हीं के नाम से ही चौबेपुर में राम कुमार ग्राम विद्यापीठ इंटर कॉलेज संचालित किया जा रहा है।

राम कुमार दीक्षित

 

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