चुनावी शब्द नेताओं को चिड़ा रहे वोटरों को गुदगुदा रहे
राहुल त्रिपाठी देश की राजनीति को तय करने वाले उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव जारी हैं। बीते 5 वर्षों में कई चुनावी शब्द जहां बड़े-बड़े नेताओं को चुभते रहें, वही समर्थकों और विरोधी एक दूसरे पर इन्हीं शब्दों का इस्तेमाल कर तंज कसते व स्वयं को ज्यादा ताकतवर बताते हुए दम भरते रहे। चुनावी शब्दों को सुनकर वोटर भी खूब अंदर ही अंदर गुदगुदी महसूस करते रहे। अब जब चुनाव जारी है तब भी इन्हीं शब्दों का इस्तेमाल कर बड़े-बड़े नेता माहौल बनाने की हर कोशिश कर रहे हैं। हम इन्हीं शब्दों के बारे में अब चर्चा करेंगे- सूबे की राजनीति में सर्वाधिक चर्चा वाला शब्द टोटी और चिलम रहा। सत्ताधारी भाजपा के लोग जहां मुख्य विपक्षी दल के प्रमुख नेता को टोटी चोर कह कर गरीबों को रोटी देने और अपनी कल्याणकारी योजनाएं बताते रहे। वहीं मुख्य विपक्षी दल के लोग समाजवादी लोगों द्वारा किए गए विकास कार्यों और सत्ताधारी पार्टी के जन विरोधी नीतियों को बता कर गांजा और चिलम जमकर खिंचाई करते नजर आए। मठ, मंदिर, मस्जिद, तिलक, टोपी, शमशान, कब्रिस्तान, भगवा, योगी, ढोंगी, गुंडा, अपराधियों की ठोको नीति, एंटी रोमियो भी चुनावी भाषणों के ...