गौतम, कोरी, पाल, दिवाकर,कुशवाह जातियों पर प्रत्याशियों की नजर
राहुल त्रिपाठी
तीसरे चरण में बिल्हौर विधानसभा में मतदान होना है। चुनाव की नीति, रणनीति और संगठन के कार्य अब मतदाताओं के सामने आ चुके हैं। धुंधली ही सही, लेकिन आने वाले समय में कौन विधायक की कुर्सी पाएगा इसको लेकर काफी हद तक तस्वीर भी साफ होने लगी है, पर जब तक एक एक मत ईवीएम यानि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन में कैद नहीं हो जाता तब तक प्रत्याशी अधिक से अधिक वोट पाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं।
वर्तमान में बिल्हौर विधानसभा में 3,96,823 से अधिक मतदाता है भाजपा, सपा और बसपा सहित कांग्रेस और आप पार्टी भी इस बार प्रबल ढंग से चुनावी मैदान में है। इन जातियों को लेकर नई नई नीति बनाकर उक्त पार्टियों के प्रत्याशी काम कर रहे हैं। सर्वाधिक जोर गौतम यानि एससी और कोरी और पाल बिरादरी पर है इन तीनों बिरादरी ओं की पर्याप्त संख्या निर्वाचन क्षेत्र में है।
कई दलों के विशेषज्ञों और पदाधिकाररिओ की माने बिल्हौर विधानसभा क्षेत्र में अभी तक 3,96,823 वोटर पंजीकृत हैं। इनमें ओबीसी 1,51,992 वोटर, एससी-एसटी वोटर 1,38,426 , इसी तरह सामान्य वोटर 80,448 हैं, जबकि मुस्लिम वोटर 25,957 हैं। एससी और ओबीसी वोटर का समर्थन मिलने की दशा में प्रत्याशी की जीत तय है। एससी में गौतम 55,825, कोरी 49,500, सोनकर (खटिक) 6,210, दिवाकर (धोबी) 7,827, कठेरिया(धानुक) 6,130, वाल्मीकि 4,500, जोगी 1,512 और अन्य 990 वोट हैं। इसी तरह ओबीसी में पाल 25,070, कुशवाहा 20,017, यादव 26,104, लोधी 15,000, कुर्मी 25,900, प्रजापति 5,000, निषाद 15,014, राठौर 5,192, भुर्जी 1,600, सुनार 1,162, माली 4,310 आदि वोटर है। इस लिए राजनैतिक दलों के लोग ओबीसी और एससी बिरादरी के वोटर्स को लुभाने में एड़ी चोटी का जोर लगाए हैं। जबकि ब्राम्हण 60,780, क्षत्रिय 14,168, वैश्य कायस्थ 5,500 वोटर हैं। क्षेत्रीय प्रत्याशी को टिकट मिले इसलिए पार्टियों के अंदर भी खींचतान जारी है।
वर्ष 2017 के चुनाव में सर्वाधिक मत पाकर भाजपा के प्रत्याशी ने जीत हासिल की थी जबकि दूसरे स्थान पर बहुजन समाज पार्टी व तीसरे स्थान पर समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी रहे थे अब आगामी 10 मार्च को ही प्रत्याशियों की सोशल इंजीनियरिंग का वास्तविक पता जनता के सामने आ पाएगा।
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