विधानसभा बिल्हौर- यादव-मुसलमान वोटरों का चुनावी भाव स्पष्ट, कटियार बिरादरी खुली नहीं
राहुल त्रिपाठी
बिल्हौर विधानसभा 209 सुरक्षित में चुनावी सरगर्मी तेज है। जातियों को देखते हुए कई दलों के लोग अपनी जीत सुनिश्चित मान रहे हैं। बिल्हौर विधानसभा में 3,90,000 से अधिक वोटर अलग-अलग जातियों के हैं। अभी चुनावी आचार संहिता आरंभ नहीं हुई है, लेकिन यादव और मुसलमान बिरादरी के वोटरों ने स्पष्ट रूप से एक दल का समर्थन बहुतायत में करते हुए उनके समर्थन में प्रचार प्रसार भी आरंभ कर दिया है। बिल्हौर विधानसभा में कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी स्थित भापकर अधिकांश मुस्लिम वोटर समाजवादी पार्टी के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। इसी तरह समाजवादी पार्टी के यादव वोटर भी अपनी इसी पारंपरिक दलीय व्यवस्था से जुड़ा नजर आ रहा है। उधर कटियार बिरादरी के लोग जो स्वयं को विधानसभा का जीत हार कराने वाला वोटर बताते हैं उनमें से अधिकांश ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं। कटियार बिरादरी के वोटर इन दिनों बसपा, सपा और भाजपा तीनों के साथ प्रचार प्रसार और दमखम दिखाते नजर आ रहे हैं, लेकिन अभी तक बीते चुनाव की तरह कटियार बिरादरी के लोग एक साथ होकर किसी भी दल में खुलकर अपना समर्थन करते या दावा करते नहीं दिख रहे हैं। उधर एक पूर्व सांसद के सपा में शामिल होने के बाद पाल बिरादरी के वोटो का भी ध्रुवीकरण होने की आशंका भाजपा और बसपा के लोग लगा रहे हैं। उधर दलित वोटरों पर अपनी नजर भाजपा, सपा, बसपा, कांग्रेस सभी लगाए हैं। इसलिए पूरी संभावना है कि प्रत्याशियों द्वारा तरह-तरह के वादे दावे, प्रलोभन देकर इनमें भी फूट डालकर अपना राजनैतिक हित सीधा कर ले और इनके वोट पाकर पाकर विधानसभा तक अपनी कुर्सी तय कर लेंगे। इसी तरह ब्राह्मण ठाकुर वैश्य वोट शांत है और टिकट फाइनल होने पर ही अपने पत्ते खोलने को लालायित है।
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युवाओं और महिलाओं की बात नहीं कर रहा है कोई प्रत्याशी
बिल्हौर विधान सभा में चुनावी सरगर्मी तेज है लेकिन कोई भी दावेदार प्रत्याशी करीब 80 से 100000 युवा वोटरों को लुभाने के लिए कोई भी वादे नहीं कर रहा है। और न ही विधानसभा में उनके लिए किसी प्रकार के विकास कार्य की बात। ऐसे में हाथों में मोबाइल और विद्यालय में पढ़ने वाले 18 वर्ष से अधिक उम्र वाले युवा अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। यही हाल महिलाओं और युवतियों का भी है सर्वाधिक दिक्कत बिल्हौर विधानसभा में 50 साल से अधिक वोटरों की संख्या भी पर्याप्त है बुजुर्गों के लिए पूरी विधानसभा में वृद्धा आश्रम, पुस्तकालय, पार्क और सार्वजनिक स्थानों पर बैठने तक की सुविधा नहीं है। ऐसे में आने वाले बनाने वाले विधायक युवाओं महिलाओं और बुजुर्गों के लिए क्या करते हैं यह देखना दिलचस्प होगा।
टिप्पणियाँ
लेकिन अभी जब तक सभी पार्टियों के टिकेट फाइनल नही हो जाते कुछ भी कह पाना जल्दबाज़ी होगा
लेकिन चलो देखते है क्या होगा...