धुर विरोधी रहे: शिवकुमार बेरिया काला बच्चा के पुत्र के लिए करेंगे जनसंपर्क
राहुल त्रिपाठी
बिहार विधानसभा में अब राजनीत नए मुकाम पर आ गई है। साल 1993 में भाजपा को साम दाम दंड भेद से करारी मात देने वाले सपा के तत्कालीन विधायक शिव कुमार बेरिया ने तत्कालीन भाजपा प्रत्याशी काला बच्चा को करारी मात दी थी और विधानसभा पहुंचे थे। तब स्थानीय भाजपाइयों ने उन पर कई तरह के आरोप लगाकर कड़ा संघर्ष भी किया था। विधानसभा चुनाव के बाद संदिग्ध हालात में भाजपा प्रत्याशी काला बच्चा की हत्या भी हो गई थी, लेकिन समय बदला सरकार बदली अब वर्तमान में भाजपा देश ही नहीं दुनिया में सबसे ज्यादा शक्तिशाली पार्टियों में से एक है, पर सत्ता की चाह और जीत की धुन में उन्होंने विरोधियों को भी अपने साथ मिलाने का नया अभियान चला रखा है। ऐसा ही मामला अब बिल्हौर विधानसभा में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। पुराने भाजपाई जो अभी तक शिवकुमार बेरिया को पानी पी पीकर भला बुरा कहते थे अब उन्हीं के साथ खड़ा होकर पार्टी का प्रचार प्रसार करेंगे।
मालूम है कि बीते दिनों शिवकुमार बेरिया साइकिल से उतरकर भगवाधारी भाजपा में शामिल हो चुके हैं। नई राजनीति यह है कि अब काला बच्चा के धुर विरोधी रहे शिवकमार बेरिया काला बच्चा के ही पुत्र मोहित सोनकर उर्फ राहुल बच्चा के समर्थन में बिल्हौर में चुनावी रैलियों में प्रतिभाग कर जनसमर्थन कर लोगों से भाजपा को जिताने के लिए हाथ जोड़ेंगे। राजनीति भी इस स्तर पर आ गई है कि आम जनता कुछ समझ नहीं पा रही है। सूत्र बताते हैं कि बिल्हौर के भाजपा प्रत्याशी मोहित सोनकर और शिव कुमार बेरिया में आज तक आमना सामना नहीं हुआ है और मन ही मन में दोनों के मध्य राहुल बच्चे हत्याकांड को लेकर खाईयां भी हैं। इसका क्या नतीजा होगा? सत्ता की चाह में विरोधी भी अपनों का प्रचार करते देख आम जनता जमकर ताली बजा रही है। इसके नतीजे 10 मार्च 2022 को आएंगे।
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विधायक बिल्हौर के थे रहते कानपुर में थे
सुरक्षित 209 बिल्हौर विधानसभा से कई बार विधायक रहे शिवकुमार बेरिया कहने के लिए बिल्हौर से निर्वाचित होकर विधानसभा पहुंचे, लेकिन आज तक उनका कोई स्थाई निवास बिल्हौर तहसील क्षेत्र के 409 गांव और नगर पालिका बिल्हौर और नगर पंचायत शिवराजपुर में नहीं हुआ हो सका। वह राजनीति और चुनाव के दौरान ही बिल्हौर क्षेत्र में अपने समर्थकों के साथ देखे गए और जातिगत राजनीति और लहर का पूरा लाभ उठाते हुए वह कई बार विधानसभा पहुंचे। उन्होंने क्षेत्र में कई काम भी करवाए, लेकिन पार्टी के कुछ लोगों तक सीमित रह जाने के कारण उनका चुनावी समीकरण विरोध में बिगड़ता चला गया। अब देखना होगा कि जब उन्होंने साइकिल छोड़कर भगवा धारण किया है, तो अपना क्या बिल्हौर में दिखा पाते हैं।

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