चुनावी भागदौड़ के बाद प्रत्याशियों ने परिवार संग गुजारा दिन
राहुल त्रिपाठी
राजनैतिक दलों द्वारा टिकट फाइनल हो जाने के बाद से प्रत्याशी बीते कई सप्ताह से दिनरात जनसंपर्क, संगठन की बैठक, डोर-टू-डोर कैंपेनिंग, जनसभा आदि में व्यवस्तता के कारण अपने परिवार से भी दूर हो गए। रविवार को मतदान के बाद सभी प्रत्याशी सोमवार को पूरे दिन अपने सगे-संबंधियों बच्चों के साथ रहे और हलका भोजन करके चुनावे की चर्चा करते रहे।
''लबें खिचे चुनावी जनसंपर्क में राहुल बच्चा के पैरों में दर्द बढ़ा''
मतदान के बाद मानसिक दबाब और उलझन से दूर भाजपा प्रत्याशी राहुल बच्चा सोमवार को निर्धारित समय पर सुबह जागे। राहुल ने बताया कि बीते कई दिनों की तरह ही मां देशरानी सोनकर ने सुबह-सुबह उन्हें गुना-गुना पानी दिया, जबकि पत्नी मानसी ने चाय के साथ उबले आलू की सब्जी में नमक-घी डालकर खिलाया। गांव-गांव पैदल संपर्क के कारण पैरों में बहुत सूजन व दर्द है, इसलिए मैं अभी डाक्टर के पास जा रहा हूं। भाई ललित को भी सर्दी जुकाम हुआ है जबकि मेरी सास लता, बहन यशस्वी, चाची सुनीता और बहन अन्नू ने भी जनसंपर्क बहुत किया, यह सब आज पूरा दिन टीवी देखते रहे और दिन गुजारा।
''राहुल, रचना सिंह, ऊषा रानी कोरी ने परिवार संग कई दिनों बाद खाना बनाकर एक साथ खाया''
सपा की प्रत्याशी रचना सिंह ने बताया कि चुनावी भागदौड़ के कारण बीते कई सप्ताह से वह अपनी दोनों बेटियों सृष्टि और दृष्टि की देखरेख नहीं कर पाई थीं और उनको हाथों से खाना भी नहीं खिला पाई थीं। इसलिए मैंने अपने मोबाइल पति पंकज को सौंपकर अपनी बेटियों का दुलारा और दाल, चावल, आलू-मटर की सब्जी, रोटी बनाई और अपनी बेटियों-पति के साथ खाई। संगठन के लोगों से भी घर पर ही मुलाकात की।
कांग्रेस प्रत्याशी ऊषा रानी कोरी ने बताया कि बिल्हौर विधानसभा में सबसे पहले मेरी टिकट फाइनल हुई थी, इसलिए मुझ पर ज्यादा मेहनत पड़ी है। आज मैं कार्यालय में ही रही और कहीं नहीं गई, चुनाव के कारण मेरे आदर्श मेरे पति लखन जी भी बहुत परेशान रहे। चुनाव के इस दौर में मैं अपनी दो बेटियों और बेटे से भी नहीं बात कर पाई। आज बैठकर पूरे परिवार ने चर्चा की। चटपटी दालमोट, संतरा, सेब, केला, अंगूर, हरी धनिया के साथ आलू-टमाटर की सब्जी-रोटी, चावल, सलाद पूरे परिवार ने साथ मिलकर खाई और मैंने कई दिनों बाद परिवार के साथ चाय बनाकर पी और पिलाई।

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