बिल्हौर की जनता करें पुकार, गांव-गांव बसें चला दो सरकार
राहुल त्रिपाठी
बिल्हौर। चुनाव आते हैं दावे किए जाते हैं, लेकिन कुर्सी मिलने के बाद चुनावी वायदे भुला दिए जाते हैं। नतीजतन बिल्हौर विधानसभा के दूर-सुदूर गांवों में आज तक परिवहन की सुविधा ही नहीं पहुंच सकी है। देश के नक्शे में जहां कानपुर मेट्रो सिटी में शुमार हो चुका है वहीं बिल्हौर तहसील के जनपदीय सीमाओं पर बसे गांवों में आज भी लोग पगडंडियों से आवागमन करने को मजबूर हैं।
''बिल्हौर के लाखों ग्रामीणों को आवागमन के लिए सरकार से बस संचालन की दरकार''
विधानसभा के सैकड़ों गांवों के हज़ारों लोगों को दिन में आवागमन के लिए एक रोडवेज बस की दरकार दशकों से बनी हुई है। बिल्हौर से जहां आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे का जुड़ाव हैं जबकि शिवराजपुर, चौबेपुर में जीटी रोड तो ककवन में लखनऊ-इटावा राजमार्ग, लेकिन रोडवेज बसों की सुविधा न होने से लोग दशकों से परेशानी उठा रहे हैं।
''सैकड़ों गांवों के हजारों ग्रामीण पैदल बिल्हौर, शिवराजपुर, चौबेपुर में पकड़ते बसें''
विषधन निवासी रिंकू, शिवकुमार बताते हैं उनके गांव के लिए आज भी रोडवेज बस सिर्फ बिल्हौर में ही देखने को मिलती है। अगर ग्रामीणों को अपने ब्लाक मुख्यालय भी जाना हो आवागमन की कोई व्यवस्था नहीं है, साइकिल से जाओं या फिर निजी वाहन से।
''कानपुर मेट्रो शहरों में शुमार, बिल्हौर के ग्रामीणों रोडवेज बसों की दरकार''
यही हाल क्षेत्र के कुरेह, मनावा, मौजमपुर, दलेलपुर, उट्ठा, औरोंताहरपुर, गदनपुर चोरसा, अनेई, कुरौली, गढ़ेवा, मद्दूपुल, रामपुर नरुआ, ककवन, वछना, गढ़ी, रौंस, देवहा आदि ग्राम पंचातयों का है। उधर शिवराजपुर ब्लाक के नदीहा, बीरामऊ, सखरेज, बिकरू, सरिगवां, डोडवा जमौली, रानेपुर, बिलहन, गोडरा, कंजती, कीरतपुर पंचायतें शामिल हैं। यहीं हाल चौबेपुर ब्लाक के कई पंचायतों का है, जहां वर्तमान में सभी पार्टियों के प्रत्याशियों की लक्जरी कारें तो दौड़ कर वोटरों को लुभा रही हैं, लेकिन बिल्हौर से विधायक चुनकर विधानसभा जाने वालों नेता जी भी तक हजारों लोगों को परिवहन की व्यवस्था उपलब्ध नहीं करा सके। शहरों में महिलाओं के लिए स्पेशल पिंक सेवा की बसें चलने का दावा करने वाले अफसर और शासन के लोगों को बिल्हौर के ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले 5 लाख से अधिक की आबादी के हितों को तवज्जों देना चाहिए।

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