बिल्हौर विधानसभा के स्थानीय मुद्दे गए भूल, दावेदार अपनी-अपनी पार्टियों वायदे को दिए तूल

राहुल त्रिपाठी 
बिल्हौर विधानसभा के चुनाव अब नजदीक है निर्वाचन आयोग द्वारा तृतीय चरण में 20 फरवरी 2022 को यहां मतदान की योजना बनाई गई है, लेकिन अभी तक किसी भी दावेदार प्रत्याशी ने बिल्हौर विधानसभा क्षेत्र के लिए अपना स्थानीय एजेंडा प्रस्तुत नहीं किया है और अपनी-अपनी पार्टियों के प्रादेशिक एजेंडे पर ही वह अपनी राजनीति चमका रहे हैं। कुछ दावेदार तो जातीय आंकड़े भुनाने पर जोर दे रहे हैं, जबकि कुछ अपने दमखम और अकूत संपत्ति, पद प्रतिष्ठा को दांव पर लगाकर विधानसभा जाने की रण नीति बना रहे हैं।
भाजपा और सपा ने अभी तक अपने प्रत्याशी के नाम घोषित नहीं किए हैं, लेकिन बसपा द्वारा बिल्हौर विधानसभा से मधु गौतम को प्रत्याशी बना दिया गया है। मधु गौतम अपनी पार्टी के परंपरागत वोट सहित बिरादरी मतदाताओं को लुभाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाए हैं। मधु ने भी अभी तक अपना स्थानीय एजेंडा मतदाताओं और क्षेत्रीय जनता को नहीं बताया है। उनके पास अपने बिरादरी के वोटों के लिए क्या एजेंडा है इसका कोई खाका नहीं है।
भाजपा के दावेदार विधानसभा प्रत्याशी सियाराम कटेरिया बीते कई वर्षों से बिल्हौर को जिला बनाने, यहां राजकीय महिला महाविद्यालय की स्थापना करने, बिल्हौर का न्याय क्षेत्र कानपुर देहात से कानपुर नगर करने, बिल्हौर में आलू किसानों को उनकी फसल का सही दाम मिल सके इसके लिए उद्यम लगाने की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन यह मुद्दे उनके चुनावी मुद्दे होंगे इसको लेकर उन्होंने अभी तक अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं की है।
भाजपा के ही दावेदार डॉक्टर नरेंद्र प्रताप ने भी कोई अभी तक स्थानीय एजेंडा प्रस्तुत नहीं किया है, लेकिन वह लगातार बिल्हौर में कैंसर हॉस्पिटल, नेत्र रोगियों के लिए अत्याधुनिक हॉस्पिटल बनाने की बात करते आ रहे हैं। इनके द्वारा भी अभी तक कोई एजेंडा प्रस्तुत नहीं किया गया है।
इनके अलावा एमपी सलोनिया, मनोज दिवाकर, सरोज प्रसाद, राहुल बच्चा स्थानीय एजेंडा की कोई सूचना नहीं दी है।
उधर समाजवादी पार्टी से टिकट की दावेदारी कर रहे शिवराजपुर के पूर्व ब्लाक प्रमुख राजेश कोरी ने विधानसभा के सभी विकास खंडों में विधायक की उपलब्धता सदैव बनी रहे, जनता का काम होता रहे, इसके लिए प्रत्येक ब्लॉक में विधायक कार्यालय बनाने की बात कही है। राजेश कोरी ने बिल्हौर में पॉलिटेक्निक की स्थापना की बात भी गई है। जबकि खिलाड़ियों के लिए राष्ट्रीय स्तर के दो स्टेडियम की स्थापना भी विधायक बनने के बाद कराने की बात वह कहते आए हैं। राजेश कोरी ने प्रदेश में सरकार आने पर बिल्हौर विधानसभा में समाजवादी भोजनालय जिसमें जरूरतमंदों को सस्ते में खाना उपलब्ध हो सके की स्थापना की पैरवी की है।
इसी समाजवादी पार्टी से टिकट का दावा कर रहे हैं रचना सिंह ने बिल्हौर विधानसभा में ट्रांसपोर्टेशन के लिए विधायक निधि से 5 बसें गांव-गांव संचालित कराने, विधानसभा के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में अल्ट्रासाउंड मशीन, एक्सरे मशीन लगवाने, किसानों को सिंचाई की सहूलियत के लिए सिंचाई नालियों को पक्का कराने, बिल्हौर में बस अड्डे का निर्माण कराने, महिलाओं के लिए विशेष वाहन चलाने, प्रत्येक ब्लॉक में एक- एक राजकीय इंटर कॉलेज की स्थापना करने की बात कही है। लेकिन अभी तक उन्होंने लिखित रूप में इसका प्रचार प्रसार क्षेत्रीय एजेडे के रूप में नहीं किया है।
मालूम है कि इसके अलावा बिल्हौर विधानसभा से गौरव, जीतेंद्र, विनय, अर्चना रावल, कल्याण सिंह दोहरे, अरुणा कोरी, आदि भी टिकट मांग रही है, लेकिन इन्होंने लिखित या मौखिक रूप से बिल्हौर का क्षेत्रीय एजेंडा अभी तक नहीं बताया है। बताने की दशा में उसे किसी न किसी माध्यम से प्रचारित किया जाएगा।
कांग्रेस से दावेदार प्रत्याशी उषा रानी कोरी ने किसान, युवा, महिलाओं, छात्र-छात्राओं के लिए विधानसभा में काम करने की बात कही है, लेकिन उनका स्थानीय एजेंडा किस प्रकार काम करेगा यह बात अभी स्पष्ट नहीं है।



नोट- यह लेखक के निजी विचार हैं इसका उद्देश्य मात्र सूचनाओं का आदान-प्रदान और चुनाव के प्रति जानकारी देना है। इसका किसी भी दल, प्रत्याशी, क्षेत्र से कोई लेना देना नहीं है। आपके सुझाव को इसमें सदैव पिरोया जा सकता है। इसलिए आपके सुझाव प्रार्थनीय हैं। आप अपने सुझाव 9305029350 और कमेंट करके दे सकते है।

टिप्पणियाँ

Unknown ने कहा…
Best wishes for always.
हरिनाथ यादव ने कहा…
सभी पार्टियों के प्रत्याशी अपने-अपने विचार व्यक्त कर रहे हैं लेकिन उसका मूर्त रूप जब भी होगा टिकट मिलने के बाद में पार्टी का क्या एजेंडा है और इसके बाद जीतने के कितने दिनों बाद प्रत्याशी अपनी जनता के बीच किए गए वादों में कितना खरा उतर सकते हैं यह 5 साल बीत जाएंगे तभी पता चल पाएगा कौन स्थानीय नेता ने जनता से क्या वादा किया था और क्या पूरा किया है या फिर व्हाट्सएप पर ही गिनाता रह गया और चला गया। अपनी मूलभूत आवश्यकताए पूरी करना जैसे खनन व ठेकेदारी और पहले से सोचे बड़े-बड़े काम करके चलता बनेगा। जनता को सिर्फ बताना है सरकार बहुत सख्त है कोई काम नहीं हो रहा है लेकिन अपना ठेकेदारी में 40% काम जमीनपर +60 % अपनी जेब मे काम हो रहा है। अब तो प्रधानों द्वारा कराए जा रहे कामों में भी जबरदस्ती नेता के फोन पर उनके कार्यकर्ता ठेकेदारी कर रहे हैं। प्रधान बिचारे रेल देख रहे हैं।

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