जो जनता को जानते नहीं और 5 साल में नहीं दिखे वह चुनाव में पैराशूट से आए
राहुल त्रिपाठी
वर्ष 2017 में विधानसभा चुनाव के बाद क्षेत्र से चुनाव लड़ने वाले सपा,बसपा, कॉग्रेस सहित अन्य कई दलों के कोई भी नेता या विधानसभा के दावेदार क्षेत्रीय जनता के साथ नहीं दिखे,लेकिन अपने हितेषीजनों, करीबियों से मेल मिलाप अंदर खाने लगातार जारी रहा। यही कारण कई क्षेत्रीय युवा दावेदार क्षेत्र में सक्रिय होकर आम जनता के सुख दुख के साथी बन कर उभरे। वहीं अब क्योंकि विधानसभा चुनाव करीब हैं तो कई पैराशूट दावेदार लगातार अपने-अपने समर्थकों के घर दुकान पर हाजिरी देते नजर आ रहे हैं। बहुत से प्रत्याशी ऐसे हैं जिनको बिल्हौर विधान सभा की बेसिक जानकारी तक नहीं है, लेकिन राजनीतिक पहुंच, अकूत संपत्ति, राजनैतिक आकाओं और जातिगत आंकड़ों के बल पर कई दावेदार जनता को छलने के लिए चुनावी मैदान में अपनी बिसात बिछाने को व्याकुल है। बिल्हौर विधानसभा के चुनाव में इस बार कानपुर, कन्नौज, हरदोई, लखनऊ, फिरोजाबाद, दिल्ली सहित कई अन्य बड़े शहरों से दावेदार चुनावी जीत की ताल ठोक रहे हैं, लेकिन जनता इस बार क्षेत्रीय प्रत्याशी को अपना विधायक बनाने पर ज्यादा सोच विचार रही है, लगभग सभी पार्टी जनों में भी यही चर्चा है। बाहरी प्रत्याशी को पचाने के लिए बगावती सुर अभी से पार्टी पदाधिकारियों समर्थकों और आम मतदाताओं में सुनाई दे रहे हैं। सूत्रों की माने तो कई पैराशूट प्रत्याशी बगावती सुर अपनाए लोगों को अटैची उपहार से साधने का प्रयास भी कर रहे हैं। करीब 468 बूथों वाली बिल्हौर विधानसभा में इन दिनों बाहरी जनपदों की कई लग्जरी गाड़ियां दबे कुचले पार्टी समर्थकों को धोते और ढाबा पर खाना खिलाते नजर आ रही हैं। ऐसे दबे कुचले नेताओं के फटे पुराने कपड़े भी अब टीनोपाल हो गए हैं और मुंह की मेहनत भी बढ़ गई है।

टिप्पणियाँ
सही मायने में मैं अपने को क्षेत्र की जनता की सच्ची संकट की साझीदार हूँ।
ऊषा रानी कोरी
कांग्रेस
विधान सभा बिल्हौर